प्लेटो
प्लेटो(Plato), यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक, गणितज्ञ और सुकरात के शिष्य एवं अरस्तु के गुरु थे! पश्चिमी जगत की दार्शनिक पृष्ठभूमि को तैयार करने में इन तीन दार्शनिको ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी! उन्हें दर्शनशास्त्र और गणित के साथ साथ तर्कशास्त्र एवं नीतिशास्त्र का भी अच्छा ज्ञान था ! प्लेटो ने कई विषयों पर लिखा लेकिन सामान्य दर्शन और नितिशाश्त्र में उनकी रुचि ज्यादा थी! प्लेटो बचपन से ही बुद्धिमान थे और बचपन से ही उनमे दर्शनशास्त्र के गुण थे!
आइए प्लेटो के बारे में और जानते है 👇
Topic Includes in this blog-
✅प्लेटो का जीवन परिचय✅प्लेटो की रचनाएँ
✅रिपब्लिक
♦ रिपब्लिक की रचना का उद्देश्य
♦ रिपब्लिक की विषय वस्तु
प्लेटो का जीवन परिचय -
ईसा पूर्व चौथी और पांचवी शताब्दी ना केवल प्राचीन यूनान के लिए क्लासिकी युग था बल्कि मानव इतिहास के लिए भी गौरवशाली युग था ! इस युग ने सुकरात,प्लेटो और अरस्तू जैसे महान दार्शनिकों को भी जन्म दिया !
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प्लेटो के प्रारंभिक जीवन और शिक्षा के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है ! प्लेटो के जन्म स्थान और जन्म तारीख की सही जानकारी प्राप्त नही हुई है लेकिन ऐसा माना जाता है की प्लेटो का जन्म एथेंस में 427-28 ईसा पूर्व में हुआ था ! प्लेटो का वास्तविक नाम अरिस्तोक्लीज था !
उनके पिता 'अरिस्टोन' तथा माता 'पेरिक्टोन' थी! 404 ई. पू. में प्लेटो सुकरात के शिष्य बने तथा सुकरात के जीवन के अंतिम क्षणों तक उनके शिष्य बने रहे ! उन्होंने मेगोरा, मिस्र, साएरीन, इटली और सिसली आदि देशों की यात्रा की !
अपने जीवन में प्लेटो ने जितने लेख लिखे है उनमे ज्यादातर लेखों में उनके अपने विचार और गुरु सुकरात के विचार ही लिखे है ! सुकरात के पुरे जीवन की जानकारी सिर्फ प्लेटो के लेख से ही मिलती है ! प्लेटो के सिद्धांतों पर सुकरात के विचारों का महान प्रभाव पड़ा!
मैक्सी के शब्दों में - प्लेटो के रूप में सुकरात ने फिर जन्म लिया!
प्लेटो के समय में कवि को समाज में आदरणीय स्थान प्राप्त था। उनके समय में कवि को उपदेशक, मार्गदर्शक तथा संस्कृति का रक्षक माना जाता था। प्लेटो के शिष्य का नाम अरस्तू था। प्लेटो का जीवनकाल 428 ई.पू. से 347 ई.पू. माना जाता है।
प्लेटो की रचनाएं -
प्लेटो द्वारा रचित ग्रंथों की संख्या 36 या 38 मानी जाती है किंतु प्रमाणिक ग्रंथ 28 है
अपोलजी, क्रिटो, रिपब्लिक, लॉज, स्टैट्स्मन आदि प्लेटो की कुछ प्रमुख कृतियाँ हैं !
प्लेटो की चिंतन पद्धति -
प्लेटो ने अपने चिंतन में कई पद्तियों का प्रयोग किया है! प्लेटों के दर्शन में विश्लेषणात्मक, निगमनात्मक, द्वंदात्मक, साद्रश्यात्मक आदि सभी के प्रयोग का आभास मिलता है!
रिपब्लिक -
रिपब्लिक किसी प्रकार की प्रबंध पुस्तक नहीं है ! राजनीति, नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान किसी एक विषय से संबंध नहीं हैं बल्कि उसमे इन सबका समावेश तो है ही साथ ही कला, शिक्षण व दर्शन का भी समावेश है!
रिपब्लिक प्लेटो की महानतम व सर्वश्रेष्ठ कृति है ! इसे प्लेटो ने 40 वर्ष की अवस्था में लिखा था! इसका तात्पर्य है राज्य की शासन व्यवस्था या संविधान से है ! प्लेटो की रिपब्लिक में राज्य की व्यवस्था का उल्लेख है ! वर्तमान समय में इस शब्द (रिपब्लिक) का प्रयोग एक विशेष प्रकार की शासन प्रणाली - गणराज्य के लिए होता है!
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👉 रिपब्लिक
रिपब्लिक की रचना का उद्देश्य -
प्लेटों ने रिपब्लिक की रचना कुछ उद्देश्यों की पूर्ति के लिए की थी !
वह इसके माध्यम से सोफीस्ट विचारको द्वारा प्रतिपादित आत्म तृप्ति के सिद्धांत को गलत सिद्ध करना चाहता था ! वह यह प्रतिपादित करना चाहता था की राज्य व व्यक्ति के हितों में कोई संघर्ष नहीं है ! प्लेटो ने निरंकुश व्यक्तिवाद का विरोध किया !
वह इसके माध्यम से एथेंस के प्रजातंत्र में प्रचलित लॉटरी द्वारा नियुक्ति की व्यवस्था का अंत करना चाहता था ! इस व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति पद के लिए योग्य समझा जाता था ! प्लेटो ने शासन संचालन को एक कला सिद्ध करते हुए उसके लिए प्रशिक्षण आवश्यक बताया ! जिससे प्रशिक्षित व्यक्ति ही शासकों के रूप में कार्य करें ! इसके लिए उसने रिपब्लिक में विशेषीकरण व एकीकरण पर जोर दिया !
तीसरा उद्देश्य था कुशासन का अंत करना ! तत्कालीन यूनानी नगर राज्य में शासक वर्ग शक्ति का खुले आम प्रयोग करते थे अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए ! प्लेटो शिक्षा व प्रशिक्षण की व्यवस्था राज्य की तरफ से स्थापित कर इस दुर्गुण को समाप्त करना चाहता था!
रिपब्लिक का स्वरूप -
रिपब्लिक केवल राजनीतिक व्यवस्था का चित्रण नहीं करती है इसमें नीतिशास्त्र, दर्शनशास्त्र और अध्यात्मशास्त्र आदि विषयों का वर्णन है !
रूसो - ने लिखा था कि रिपब्लिक राजनीतिशास्त्र का ग्रंथ नहीं है किंतु शिक्षा पर कभी भी लिखा गया सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है ! यह राजनीतिशास्त्र का भी ग्रंथ है क्योंकि इसमें विभिन्न शासन प्रणालियों का, राज्य के आदर्श स्वरूप का तथा आदर्श शासन प्रणाली का वर्णन है !
एच सेबाइन - रिपब्लिक एक ऐसी पुस्तक है जिसका वर्गीकरण नहीं हो सकता है ! उसकी विषय वस्तु इतनी व्यापक है कि वह संपूर्ण मानव जीवन पर विचार करती है ! रिपब्लिक का मुख्य विषय अच्छे मनुष्य और अच्छे जीवन की समस्या पर विचार करना है !
प्लेटो के अनुसार अच्छा मनुष्य और अच्छा जीवन अच्छे राज्य में ही पाया जा सकता है! रिपब्लिक का राजनीतिक दर्शन एकीकृत है और इसकी तर्क बुद्धि सरल है ! रिपब्लिक में मानव जीवन की समस्याओं का समग्र चिंतन करते हुए कई विषयों पर विचार किया गया है !
रिपब्लिक की विषय-वस्तु -
1 आध्यात्मिक भाग - इसमे प्लेटो पहले प्रश्न अच्छा आदमी कौन है और इसका निर्माण कैसे हो सकता है का जवाब देता है और अच्छाई की व्याख्या करता है !
2 नैतिक दर्शन - इस भाग में मानव आत्मा के गुणों पर प्रकाश डाला गया है ! प्लेटों नीतिशास्त्र व राजनीतिशास्त्र में कोई भेद नहीं समझता है ! नीतिशास्त्र के नियम राज्य व व्यक्ति दोनों पर लागू होते हैं !
3 शिक्षा - प्लेटों उच्च शिक्षा पर बल देता है और उसका यह मानना है की आदर्श राज्य का संचालन इस प्रकार की शिक्षा प्राप्त दार्शनिक शासकों द्वारा ही किया जाना चाहिए !
4 संपत्ति और परिवार- इस भाग में प्लेटों का मानना यह है की जो सत्ता चाहते हैं उन्हें उसका मूल्य चुकाना होगा !
5 आदर्श राज्य का पतन - इस भाग में प्लेटो का कहना है की आदर्श राज्य के अस्तित्व के लिए जरूरी नियंत्रण रखना आवश्यक है क्योंकि राज्य एक निरंकुश राज्य में परिवर्तित हो सकता है !
निष्कर्ष - में हम कह सकते हैं की रिपब्लिक प्लेटो की अमर कृति है ! इसमे संपूर्ण मानव जीवन का दर्शन निहित है लेकिन कई विचारकों ने इसकी आलोचना की है !
बार्कर - के अनुसार यह कहना आसान है कि रिपब्लिक काल्पनिक है ! बादलों में नगर है ! एक सूर्यास्त के दर्शन के समान है !
सेबाइन - के अनुसार रिपब्लिक के विवेचन का धरातल काल्पनिक है फिर भी वास्तविक संस्थाओं के निरीक्षण पर आधारित है!
हम उम्मीद करते हैं इस ब्लॉग से आपको इस टॉपिक को समझने में मदद मिली होगी
धन्यवाद
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👉 रिपब्लिक
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