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राजनीतिक सांस्कृतिक उपागम क्या है? विशेषता, निर्धारक तत्व और प्रकार व आलोचना

 राजनीतिक सांस्कृतिक उपागम 

(Political Culture)






राजनीतिक संस्कृतिअगर हम इसे एक परिभाषा (definition) से समझने की कोशिश करें तो वो ये होगी राजनीतिक संस्कृति से अभिप्राय एक समाज की जनता की भावनाओं और मूल्यांकन पर आधारित राजनीतिक वयवस्था से है।

या फिर हम कह सकते हैं की 

राजनीति के प्रति जनता की मनोव्रति क्या है और राजनीतिक व्यवस्था में उनकी भूमिका क्या है इसी को हम एक राष्ट्र की यानी की एक देश की राजनीतिक संस्कृति कह सकते हैं।

अब ये तो हो गई इसकी परिभाषा आइए हम इसे और आसान शब्दों में और उदाहरण से समझने की कोशिश करते है ! 



Topic Includes in this blog- 

✅राजनीतिक सांस्कृतिक उपागम क्या है?
राजनीति संस्कृति की विशेषताएँ  
राजनीतिक संस्कृति को प्रभावित करने वाले कारक
आमंड और पाल का सिद्धांत 
राजनीतिक संस्कृति के प्रकार
        ♦ 
संकीर्ण राजनीतिक संस्कृति (Parochial Political Culture) 
        ♦ आत्मगत राजनीतिक संस्कृति (The Subject Political Culture)
        ♦ सहभागितापूर्ण राजनीतिक संस्कृति (The Participant Political Culture)
राजनीतिक संस्कृति उपागम की आलोचना 
         


 

राजनीतिक संस्कृति अर्थ व परिभाषा

   

राजनीतिक संस्कृति के बारे में जानने से पहले हमें यह जानना जरूरी है की संस्कृति किसे कहते है?

संस्कृति किसी विशेष समाज व समुदाय की जीवनशैली होती है ! जीवनशैली से मतलब लोगों के रहने, खाने-पीने व पहनने का तरीका वह उनकी जीवनशैली होती है और उसी को संस्कृति कहा जाता है ! 

जैसे की भारतीय शहरों की संस्कृति गांवों की संस्कृति से अलग होती है! खान-पानवेशभूषामान्यताओंनियमोंमूल्यों के हिसाब से दक्षिण भारत की संस्कृति उत्तर भारत से अलग है! 

उदाहरण के लिए - उत्तरी भारत में लोग खाने में दाल - चावल खाते है और दक्षिण भारत में लोग अलग तरह का खाना खाते हैं जैसे इडली, डोसा और सांबर आदि! 

हमारे पहनावे (कपड़े पहनने के तरीकों में) में अंतर होता है और साथ ही हमारे विश्वास व मान्यताओं में भी अंतर होता है!

इस टॉपिक को और आसान शब्दों में समझने के लिए आप यह विडिओ देख सकते हैं  👇  

👉 राजनीतिक संस्कृति  

👉 राजनीतिक सांस्कृतिक उपागम 

अब सवाल यह उठता है कि संस्कृति और राजनीतिक संस्कृति में क्या अंतर हैं? 

राजनीतिक संस्कृति, संस्कृति का एक अंग यानी की उसका हिस्सा है। यह एक व्यक्ति के राजनीतिक विचारों का समूह है यानी की एक व्यक्ति के राजनीति को लेकर जो विचार होते हैं उसे हम राजनीतिक संस्कृति कह सकते हैं!

दोस्तों हर एक देश में अलग-अलग संस्कृति और अलग विचारों और मान्यताओं को मानने वाले लोग रहते हैं जिस तरह से लोगों की अपनी जीवनशैली, मान्यता व विश्वास होते हैं उसी तरह से लोगों की राजनीति के लिए भी कुछ मान्यताएँ व विश्वास होते हैं, जिस तरह से लोगों में सांस्कृतिक रूप से जो अंतर सांकृतिक अंतर (cultural difference) होता है ठीक उसी तरह से लोगों के राजनीतिक विचार और मान्यताओं में भी अंतर होता है! एक व्यक्ति के राजनीतिक विचार दूसरे व्यक्ति से अलग हो सकते हैं ! प्रत्येक संस्कृति में व्यक्ति के व्यवहार के तरीके,उनकी मान्यताओंविश्वास आदि मिलते है 

हम कह सकते हैं की एक देश में राजनीति को लेकर उस देश के लोगों की क्या मान्यता व विश्वास हैं यानी की राजनीति को लेकर लोग किन चीजों को पसंद करते हैं, किन्हे नहीं करते हैं और वे अपने देश की राजनीति के बारे में क्या सोचते हैं उसे राजनीतिक संस्कृति कहा जाता है !

दोस्तों राजनीतिक संस्कृति की जो ये अवधारणा  है, वो संस्कृति के विचार पर आधारित है। संस्कृति में किसी देश के लोगों के व्यवहार, मान्यताएं, विश्वास, घृणा, स्वामिभक्ति, साहित्य, परम्पराएं, कला-कौशल, सामाजिक मूल्य, नैतिकता आदि ये सभी बातें शामिल होती हैं।

पिछले तीन-चार दशकों से विश्व में राजनीति को समझने के लिए कई नए प्रयास यानी की कोशिशें की जा रही हैं इसी के परिणामस्वरूप राजनीति विज्ञान में कई नई मान्यताओं तथा अवधारणाओं का जन्म और विकास हुआ हैं। राजनीतिक संस्कृति का विचार भी उन्हीं में से एक हैं।

जिस तरह हर एक देश की अपनी संस्कृति होती हैं, उसी तरह हर एक देश की अपनी राजनीतिक संस्कृति भी होती हैं। किसी भी देश की राजनीतिक संस्कृति स्थिर नही होती राजनीतिक संस्कृति में भी परिवर्तन होता रहता हैं लेकिन उसके परिवर्तन की गति तेज या धीमी हो सकती हैं।

किसी भी देश की राजनीतिक व्यवस्था को अच्छी तरह समझने के लिए उस देश की राजनीतिक संस्कृति को समझना बहुत जरूरी होता है की उस देश की जनता की राजनीति के प्रति क्या मनोवृति, मान्यताएँ और विश्वास हैं ! राजनीतिक संस्कृति को समझे बिना किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था को नहीं समझा जा सकता है !

मुख्यतः किसी देश के अंदर राजनीतिक व्यवस्था का जो निर्धारण होता है और उसमे जो भी परिवर्तन (changes) होते हैं उस देश की राजनीति संस्कृति को ध्यान में रख कर किया जाता है ! हम ऐसा कह सकते हैं की राजनीतिक संस्कृति राजनीतिक व्यवस्था के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है !

राजनीतिक संस्कृति को अलग-अलग विद्वानों ने इसे अलग-अलग नामों से संबोधित किया है यानी की अलग - अलग नाम से पुकारा है 

जैसे आलमंड इसे कार्य के प्रति अभिमुखीकरण कहता है! 

बीयर इसे राजनीतिक संस्कृति कहता है। 

ईस्टन इसे पर्यावरण कहता है। 

स्पीरो इसे राजनीतिक शैली कहता है। 

राजनीतिक संस्कृति का विचार एक नूतन यानी की नया विचार हैं। 'राजनीतिक संस्कृति' शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल ऑमण्ड ने 1956 में किया था। 

आमंड के अनुसार - “राजनीतिक संस्कृति किसी राजनीतिक व्यवस्था के सदस्यों में राजनीति के प्रति व्यक्तिगत मनोवृति का नमूना है ।”

आमंड और पा का मानना है कि यदि हमें किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था को समझना है तो हमें राजनीति के प्रति जनता की मनोवृति और राजनीतिक व्यवस्था में उनकी भूमिका से शुरुआत करनी चाहिए इसी को हम एक राष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति का नाम दे सकते हैं !

जब हम एक समाज की राजनीतिक संस्कृति की बात करते हैं तो उससे हमारा मतलब इसकी जनता की भावनाओ और मूल्यांकन पर आधारित एक राजनीतिक व्यवस्था से है! 

दोस्तों हम कह सकते हैं की राजनीति को लेकर लोगों के जो विचार(thoughts) और मान्यताएं (beliefs) होते हैं और उन राजनीतिक विचारों और मान्यताओं पर आधारित राजनीतिक व्यवस्था को राजनीतिक संस्कृति कहा जाता है !

आगे दोस्तों बात करते हैं राजनीतिक संस्कृति की विशेषताओं के बारे में


 

राजनीति संस्कृति की विशेषताएँ  


  • राजनीतिक संस्कृति एक व्यक्तिपरक धारणा हैक्योंकि इसमें लोगों के विचारों, विश्वासों  व मूल्यो का अध्ययन किया जाता है।
  • राजनीतिक संस्कृति एक व्यापक धारणा हैक्योंकि यह राजनीतिक व्यवहार के अनेक तत्वों को अपने में समेटे रहती है और इसमे हम लोगों के राजनीति के प्रति व्यवहार (राजनीति को लेकर लोग कैसे व्यवहार करते हैं, उनके विचार व मान्यता क्या हैं) का भी अध्ययन  करते हैं !
  • राजनीतिक संस्कृति, संस्कृति का ही एक अंश होती हैक्योंकि इसमें लोगों के राजनीतिक मूल्य व विश्वास ही शामिल होते हैं और हम उनका अध्ययन करते हैं ! 
  • राजनीतिक संस्कृति का स्वरूप प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में अलग-अलग होता हैक्योंकि हर एक देश की संस्कृति अलग-अलग होती है और उसमे अन्तर पाया जाता है।
  •  राजनीतिक संस्कृति एक गतिशील व परिवर्तनशील अवधारणा है क्योंकि लोगों के राजनीति के प्रति विचार, विश्वास और व्यवहार में बदलाव आता रहता है !
  • राजनीतिक संस्कृति और राजनीतिक विकास में गहरा सम्बन्ध होता है। राजनीतिक संस्कृति राजनीतिक समाजीकरण व आधुनिकीकरणविकास की प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है। एक देश की राजनीतिक संस्कृति जैसी होगी उस देश की राजनीतिक व्यवस्था भी वैसी होगी और जिस देश की राजनीतिक व्यवस्था जैसी होगी उस देश का विकास भी वैसा ही होगा  इसलिए कहा जा सकता है की राजनीतिक संस्कृति और राजनीतिक विकास में काफी महत्वपूर्ण संबंध है !
  • एक अड़ियल प्रकार की राजनीतिक संस्कृति राजनीतिक आधुनिकीकरणसमाजीकरण व  विकास का मार्ग अवरुद्ध कर देती है। यानि की अगर एक देश की राजनीतिक  संस्कृति अड़ियल होगी तो उस देश की राजनीतिक व्यवस्था भी वैसी होगी और जिस देश की राजनीतिक व्यवस्था जैसी होगी उस देश का विकास भी वैसा ही होगा और यह उस देश के विकास की राह में एक बड़े पत्थर की तरह होगी ! 
  • भूगोलपरम्पराएंइतिहासआदर्शजीवन मूल्यजलवायुसामाजिक तथा आर्थिक तत्वराष्ट्रीय प्रतीक आदि तत्व भी राजनीतिक संस्कृति के निर्माण में योगदान देते हैं अर्थात हम कह सकते हैं की यह सभी तत्व राजनीतिक संस्कृति को निर्धारित करते है की देश की राजनीतिक संस्कृति कैसी होगी !


अभी तक हमने जाना की राजनीतिक संस्कृति किसे कहते हैं, किसी भी देश की राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए उस देश की राजनीतिक संस्कृति को समझना क्यों जरूरी है, यह उसे कैसे प्रभावित करती है और उसकी विशेषता क्या हैं आइए जानते राजनीतिक संस्कृति को कौन-से तत्व प्रभावित करते हैं !


इस टॉपिक को और आसान शब्दों में समझने के लिए आप यह विडिओ देख सकते हैं  👇  

👉 राजनीतिक सांस्कृतिक उपागम  

👉 राजनीतिक संस्कृति को प्रभावित करने वाले कारक

राजनीतिक संस्कृति को प्रभावित करने वाले कारक  


किसी राजनीतिक व्यवस्था में राजनीतिक संस्कृति के निर्माण को ये सभी तत्व प्रभावित करते हैं। 

1. इतिहास - राजनीतिक संस्कृति के निर्माण में ऐतिहासिक तत्वों का महत्वपूर्ण स्थान होता है, क्योंकि इतिहास ही वह नीव है जिस पर किसी देश का संपूर्ण ढांचा खड़ा होता है । अगर हम ब्रिटेन की राजतंत्र की व्यवस्था को देखें तो हम यह पाते हैं कि ब्रिटेन के लोगों में ऐतिहासिक आधार पर राजा के लिए खूब आदर, सम्मान और श्रद्धा है। शायद इसी वजह से उन्होंने सम्राट का जो पद है उसे कायम रखा है । 

इसी तरह भारत में स्वतंत्रता सेनानियों और महान व्यक्तियों के प्रतीकों और स्मारकों को अत्यंत श्रद्धा से नमन किया जाता है। क्योंकि भारत शताब्दियों तक ब्रिटिश उपनिवेश का शिकार रहा जिसके कारण एक लंबे स्वतंत्रता संघर्ष में जिन लोगों तथा प्रतीकों का योगदान रहा, उनके लिए लोग आज भी आदर तथा सम्मान की भावना रखते हैं। इसका आधार ऐतिहासिक ही है।

और साथ ही साथ वर्तमान पीढ़ी भावी पीढ़ी से बहुत कुछ सीखती है जब भी किसी देश में राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन की आवश्यकता होती है तो वह इतिहास में हुई घटनाओं को ध्यान में रखकर और उससे सीख कर अपनी संस्थाओं और व्यवस्थाओं, नियमों का निर्धारण करते है! 

वर्तमान पीढ़ी इतिहास से बहुत कुछ सीखती है और इतिहास उन्हें प्रभावित करता है इसलिए हम कह सकते है की इतिहास समाज की राजनीतिक संस्कृति को प्रभावित करता है ! 


2. सामाजिक तथा आर्थिक विकास- विकास भी राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण करता हैं। देश में शिक्षा का प्रचार-प्रसार, उद्योगीकरण, वैज्ञानिक व तकनीकी विकास आदि तत्व नागरिकों के राजनैतिक विश्वासों और मूल्यों को प्रभावित करते हैं क्योंकि जिस तरह का एक देश व समाज का सामाजिक और आर्थिक विकास होगा उस तरह की उसकी राजनीतिक संस्कृति होगी ! 

अगर समाज में निरंतर सामाजिक व आर्थिक विकास होता है तो हम कह सकते है उस समाज की राजनीतिक संस्कृति गतिशील व विकासशील है और यदि इसके विपरीत स्थिति है तो हम कह सकते है शायद उस समाज की राजनीतिक संस्कृति अढ़ियल प्रकृति की होगी !   

3. धार्मिक विश्वास - धार्मिक विश्वास राजनीतिक संस्कृति को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है! प्रत्येक व्यक्ति की अपनी धार्मिक मान्यताएँ व विश्वास होते है ! एक समाज कई लोगों से मिलकर बनता है समाज में लोगों की जैसी धार्मिक मान्यताएँ व विश्वास होंगे उसी तरह की उस समाज की राजनीतिक संस्कृति भी होगी !  

 4. भौगोलिक आधार - हर एक देश की भौगोलिक अवस्था भी वहां की राजनीतिक संस्कृति का एक प्रमुख आधार होती है। राज्यों की संस्कृति, उनकी स्थिति, सीमाओं से जरूर प्रभावित होती है। जैसे की ब्रिटेन एक द्वीप है और इसी द्विपीय अलगाव के कारण वह अन्य देशों के साथ सुरक्षित रहा। 

इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका का दुनिया से अलगाव तथा विशेष स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता ने इसे विश्व शक्ति बनने में मदद की है। अतः राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण काफी हद तक भौगोलिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है ।

5. सामान्य संस्कृति - समाज की सामान्य संस्कृति, राजनीतिक संस्कृति का आधार स्तंभ होती है । राजनीतिक संस्कृति, समाज की सामान्य संस्कृति से संबंधित होती है और वह उस पर निर्भर होती है, तथा कभी-कभी पूरी तरह से आधारित भी हो जाती है । लेकिन राजनीतिक संस्कृति समाज की संस्कृति का भाग होते हुए भी उससे अलग नहीं हो सकती । 

यदि राजनीतिक संस्कृति में लिया गया निर्णय, सामान्य संस्कृति को ध्यान में रख कर किया जाए तो, वह जरूर सफल होती है। लेकिन अगर इसके विपरीत स्थिति हो तो इसमें क्रांतिकारी परिवर्तन हो सकते हैं ।

6. सामाजिक आर्थिक संरचना - किसी भी समाज का सामाजिक, आर्थिक ढांचा, राजनीतिक संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार होता है । जिस देश की सामाजिक, आर्थिक संरचनाएं विकसित अवस्था में हैं, वहां पर राजनीति संस्कृति का विकास होता है । 

इसके विपरीत स्थिति एशिया, अफ्रीका में है ! ये राजनीतिक संस्कृति पूरी तरह नहीं अपना सकते है । क्योंकि इन देशों के समाज जाति, लिंग भेदभाव के बंधनों में जकड़े हुए हैं । दूसरी ओर इन देशों की आर्थिक व्यवस्था, निर्धनता और आर्थिक असमानताओं से जूझ रही है । इन देशों की समस्या यह है कि ये विकसित देशों की राजनीतिक संस्कृति को हासिल करना चाहते हैं, पर ये अपनी व्यवस्थाओं में जरूरी सुधार लाने के लिए तैयार नहीं है ।

7. विचारधाराओं का आधार  - शुरू में देशों की विचारधाराओं में कोई टकराव नहीं था, लेकिन विश्व के आधुनिक बनते जाने के साथ - साथ इनमें टकराव शुरू हो गया । 

प्रथम विश्व युद्ध के समय फासीवाद Italy तथा नाजीवाद Germany विचारधाराओं का लोकतंत्र की विचारधारा से संघर्ष था, और दूसरी ओर  द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद साफ तौर पर दो विरोधी धारणाओं पूंजीवादी तथा साम्यवादी का संघर्ष शुरू हुआ । हम समज सकते हैं इन दोनों विचारधाराओं का उद्देश्य अपने राजनीतिक संस्कृति का प्रभाव पूरे विश्व में फैलाना था। इस तरह हम कह सकते हैं की अब विचारधारा राजनीतिक संस्कृति का आधार बन गई है ।

8. राजनीतिक सहभागिता - देश के नागरिकों में राजनैतिक चेतना होना और देश की राजनीतिक गतिविधियों में उनका भाग लेना तथा अपनी राजनैतिक व्यवस्था के विषय में ज्यादा से ज्यादा ज्ञान प्राप्त करना राजनीतिक संस्कृति का आधार हैं। लोगों को जितना ज्ञान होगा उसी तरह के उनके विचार, विश्वास और मान्यताएँ होंगी और फिर उसी तरह की राजनीतिक संस्कृति होगी! 

👉 राजनीतिक संस्कृति को प्रभावित करने वाले कारक

👉 राजनीतिक संस्कृति के प्रकार

राजनीतिक संस्कृति के प्रकार

राजनीतिक सहभागिता के आधार पर वर्गीकरण करने वाले प्रमुख विद्वान ऑमण्ड व वर्बा हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में जनता सहभागिता चाहती है। लेकिन सभी व्यवस्थाओं में पूर्ण व सक्रिय राजनीतिक सहभागिता का होना जरूरी नहीं है। इसलिए इस आधार पर  जनसहभागिता का स्तर क्या है। लोग राजनीति के प्रति उदासीन हैं या सक्रिय, राजनीतिक संस्कृति को शुद्ध रूप में तीन भागों में बंट जाता है :-

ऑमण्ड व वर्बा ने तीन प्रकार की राजनीतिक संस्कृति की बात की है

♦ संकीर्ण राजनीतिक संस्कृति (Parochial Political Culture) 

♦ आत्मगत राजनीतिक संस्कृति (The Subject Political Culture)

♦ सहभागितापूर्ण राजनीतिक संस्कृति (The Participant Political Culture)

 


1. संकीर्ण राजनीतिक संस्कृति (Parochial Political Culture) - 

  • संकीर्ण  राजनीतिक संस्कृति से आशय उस राजनीतिक संस्कृति से है जिसमें व्यक्ति राजनीतिक तंत्र के विभिन्न अंगों तथा उनके कार्यों के बारे में बिल्कुल जानकारी न रखता हो या उसकी जानकारी साधारण हो। 
  • इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति में जनता निरक्षर (पढ़ी -लिखी नहीं) होती है! 
  • इस समाज में जनता में राजनीतिक वयवस्था में बदलाव की इच्छा का अभाव होता है यानि की वह बदलाव लाने के बारे में बात नहीं करते है !  
  • राजनीतिक नेता ही धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक भूमिकाओं को एक साथ अदा करते हैं। 

  • इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति कम विकसित तथा परम्परागत राजनीतिक समाजों मेंं पाई जाती है। 

अफ्रीकी जनजातीय समाज इस संस्कृति का एक उदाहरण है

अर्थात हम कह सकते है इस प्रकार की संस्कृति में जनता पढ़ी-लिखी नहीं होती है और उन्हें राजनीति का कोई ज्ञान नहीं होता है यानि की उन्हें राजनीति के बारे में नहीं पता होता है जिसके कारण वे इसके उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को अनदेखा करती है और किसी भी तरह के बदलाव की बात नहीं करती है !

 

2. आत्मगत राजनीतिक संस्कृति(The Subject Political Culture)- 

  • इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति में व्यक्ति व्यवस्था के बारे में पूरी जानकारी रखता हैं। उसे कार्यपालिका, नौकरशाही तथा न्यायपालिका के बारे में पूरा ज्ञान होता हैं। उसे इन संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले कार्यों का भी ज्ञान होता हैं और गौरव भी महसूस करता है ! लेकिन उसमें अरुचि भी दिखात है ! 
  • इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति में वह नौकरशाही के आदेशों का पालन आँख मींच कर करता हैं क्योंकि उसके निर्णयों को चुनौती देने की शक्ति उसमें नहीं होती। 
  • इसमें जनता सीमित रूप से राजनीति में सक्रिय सहभागिता निभाती है! 
  • इस संस्कृति को प्रजामूलक संस्कृति भी कहा जाता है।
  • इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति में जनता निष्क्रिय रूप से कानूनों का पालन करती है! 
  • इसमे जनता, सरकार व सरकारी विभाग और उनके कार्यों से परिचित होती है और गौरव भी महसूस करती है लेकिन उसमें अरुचि भी दिखाती है ! 

अर्थात हम कह सकते है इस प्रकार की संस्कृति में जनता कानूनों का पालन करती है और राजनीति में भी भाग लेती है ! इसमे जनता को राजनीति और उसमे होने वाले कामों के बारे में पता होता है लेकिन जनता फिर भी रुचि नहीं दिखाती है !

 

3. सहभागितापूर्ण राजनीतिक संस्कृति (The Participant Political Culture)- 

  • इस प्रकार की संस्कृति में व्यक्ति को राजनीतिक तंत्र का पूरा ज्ञान होता है। उसे शासन के अंगों तथा उसके कार्यों का ज्ञान होता है। इसके साथ ही सरकार की नीतियों को प्रभावित करने वाले तत्वों, यथा राजनीतिक दलो, दबाव समूहों तथा प्रचार साधनों का उसे पूरा ज्ञान होता हैं।
  • इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति में जनता राजनीतिक प्रक्रिया के अंतर्गत सहभागिता निभाती है!
  • इसमें लोगों का राजनीतिक व्यवस्था के प्रति लगाव व विश्वास उच्च स्तर का रहता है।
  •  इसमें जनता अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनी रहती है।  
  • जनता शासन की नीतियों को भी प्रभावित करती है। वह स्वीकृति व अस्वीकृति देकर अपनी भावनाओं व अपने मत का प्रदर्शन करती हैं! राज्य के समक्ष अपनी मांगे रखती है! सहभागी राजनीतिक संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति सरकार की आलोचना तथा मूल्यांकन करने का अधिकार होता हैं।
  • वह राजनीतिक व्यवस्था में भाग लेती है और वह सक्रियता की भूमिका निभाती हैं!
  • इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति उन समाजों में पाई जाती है, जहां जनता को राजनीतिक सहभागिता व सहकारिता के पूरे अवसर दिए जाते हैं। 
  • इस प्रकार की संस्कृति विकसित देशों में पाई जाती है। 
  • इसे प्रजातन्त्रीय राजनीतिक संस्कृति भी कहा जाता है।


अर्थात हम कह सकते है इस प्रकार की संस्कृति में जनता राजनीति में भाग लेती है और इसमे जनता को राजनीति के बारे में पता होता है इसके साथ ही इसमे जनता अपनी मांगों को भी रखती है और सरकार व शासन द्वारा बनाई गई नीतियों पर अपने विचार भी सामने रखती है ! 

फिर भी ये तीनों प्रकार की संस्कृतियां विशुद्ध नहीं होती। प्रत्येक राजनीतिक संस्कृति में दूसरी राजनीतिक संस्कृति के तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि आमंड ने कहा कि राजनीतिक संस्कृतियाँ मिश्रित प्रक्रिया की होती हैं। 

इन मिश्रित संस्कृतियों को उसने पुनः 4 भागों में विभाजित किया हैं-- 

(अ) संकुचित प्रजाभावी राजनीतिक संस्कृति, 

(ब) प्रजाभावी सहभागी राजनीतिक संस्कृति,

(स) संकुचित सहभागी राजनीतिक संस्कृति, 

(द) नागरिक राजनीतिक संस्कृति। 


संकुचित प्रजाभावी राजनीतिक संस्कृति - इस प्रकार की संस्कृति में नागरिक संस्थाओं के प्रति आस्था रखना छोड़ देता है तथा उसमे अति विशिष्ट सरकारी संस्थाओं के प्रति निष्ठा विकसित होने लगती है । सरकारी संस्थाओं में जानकारी के बावजूद नागरिक इस को प्राप्त करने में अनभिज्ञ होते हैं ।

प्रजाभावी सहभागी संस्कृति - इस प्रकार की संस्कृति में नागरिकों का एक महत्वपूर्ण भाग राजनीतिक मुद्दों के बारे में जनता और वह सक्रिय होता है । जबकि कुछ नागरिक उदासीन होते हैं । इस तरह  की संस्कृत में एक सामान्य नागरिक यह जानता है कि उसे सक्रिय तथा सहभागी होना चाहिए फिर भी उसे राजनीतिक निर्णय में भाग लेने का मौका बहुत कम ही मिल पाता है ।

संकीर्ण सहभागी संस्कृति - इस प्रकार की संस्कृति में जनता को प्रचार रैलियों तथा राष्ट्रीय चुनावों में सहभागिता के लिए प्रेरित किया जाता है ।

नागरिक संस्कृति - जब किसी समाज की राजनीतिक संस्कृति में प्रथम तीनों प्रकार की संस्कृति की विशेषताएं पाई जाती हैं, तो उसे 'नागरिक राजनीतिक संस्कृति' कहा जाता हैं। आमंड तथा बर्वा ने अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी तथा इटली की राजनीतिक संस्कृति को नागरिक राजनीतिक संस्कृति की संज्ञा दी हैं।

इस प्रकार की संस्कृति में नागरिकों में जन सहभागिता तथा राजनीतिक प्रभाविता की भावना होती है । उनमें अन्य लोगों पर विश्वास करने की भावना होती है तथा गैर शासकीय संस्थाओं में भी उसकी आस्था होती है । इस प्रकार की संस्कृति में वह काफी राजनीतिक रूप से सक्रिय होता है ! वह सरकार के सभी मामलों पर विरोध नहीं करता है। 

👉 राजनीतिक संस्कृति के प्रकार


राजनीतिक सांस्कृतिक उपागम की आलोचना 

 
समकालीन राजनीति विज्ञान में कई अन्य उपागमों की तरह राजनीतिक संस्कृति उपागम पूरा नहीं है सकी कुछ सीमाएं हैं! 

1. अस्पष्ट अवधारणा  - राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा स्पष्ट नहीं है। विभिन्न राजनीतिक विचारक इसकी परिभाषा को लेकर एकमत नही हैं।

जिन विद्वानों ने राजनीतिक संस्कृति को परिभाषित करने की कोशिश की  है, वे भी अपने विचारों में स्पष्ट (clear) नही हैं।

विभिन्न विद्वान किसी ऐसी तकनीकी का तय करने में भी असफल रहे, जिसके द्वारा राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण ठीक ढंग से किया जा सके। 

राजनीतिक संस्कृति का विचार पूरी तरह से काल्पनिक ही लगता हैं।

 

2. राजनीतिक संस्कृति उपागम पुराना विचार है ना कि नया - कई विद्वानों का कहना है कि राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा कोई नया विचार नही है। इसमें केवल पुरानी मान्यताओं को नया लेबल लगाकर प्रस्तुत किया गया है।

असलियत तो यह है कि शरीर वही है, केवल चोला अर्थात् नाम बदल गया हैं। यह कोई मौलिक विचार अथवा अवधारणा नहीं हैं।

ऐब करियन एवं मेसातेन के अनुसार," यह अवधारणा पुराने विचार पर नया लेबल मात्र हैं।"

 

3. सामान्य संस्कृति तथा राजनीतिक संस्कृति में कोई स्पष्ट विभाजन रेखा नहींआमण्ड तथा बर्वा ने यह तो स्वीकार किया है कि सामान्य संस्कृति तथा राजनीतिक संस्कृति में घनिष्ट संबंध हैं, लेकिन यह संबंध किस सीमा तक है, इसका उत्तर देने में वे असफल रहे है। 

जिस वजह से कई सवाल उठते हैं जैसे की 

  • क्या सामान्य संस्कृति तथा राजनीतिक संस्कृति के निर्धारक तत्व समान हैं? 
  • यदि वे अलग-अलग है तो कौन-से तत्व सामान्य संस्कृति को निर्धारित करते हैं तथा कौन-से तत्व राजनीतिक संस्कृति को निर्धारित करते हैं। 
  • क्या सामान्य संस्कृति के बदलने पर राजनीतिक संस्कृति में भी स्वाभाविक रूप से परिवर्तन हो जाता हैं? ये कुछ ऐसे सवाल है जिनका उत्तर ये विद्वान देने में असफल रहे हैं।

 

4. राजनीतिक संस्कृति तथा राजनीतिक संरचना का संबंध अस्पष्ट

राजनीतिक संरचनाएँ राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण करती हैं अथवा राजनीतिक संस्कृति के कारण राजनीतिक संरचनाएँ निर्धारित होती हैं? इन सवालों का कोई इन विद्वानों ने नहीं दिया हैं। 


5. राजनीतिक संस्कृति का तुलनात्मक अध्ययन असंभव -

राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा की मुख्य विशेषता यह बताई जाती रही है कि इसके द्वारा विभिन्न राजनीतिक संस्कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। लेकिन इस तरह का तुलनात्मक अध्ययन संभव नहीं हैं, 

क्योंकि अमेरिका की राजनीतिक संस्कृति का अध्ययन करने के बावजूद आमण्ड के लिए रूस की राजनीतिक संस्कृति का अध्ययन संभव नहीं था।

 राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा के प्रतिपादकों का यह भी विचार है की राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण वैज्ञानिक पद्धित(scientific method) द्वारा संभव हैं, जबकि असलियत यह है कि अधिनायकवादी (तानाशाही) समाजों में इस प्रकार के सर्वेक्षण(survey) संभव नहीं हैं, क्योंकि इन व्यवस्थाओं में साक्षात्कार(interview) नहीं लिये जा सकते।


6. राजनीतिक संस्कृति उपागम उदारवादी चिंतन के साथ निकटता से जुड़ा है इसलिए इसे पश्चिमी सिद्धांत व उदारवादी सिद्धांत भी कहा जाता है!


हम उम्मीद करते हैं इस ब्लॉग से आपको इस टॉपिक को समझने में मदद मिली होगी

धन्यवाद 


इस टॉपिक को और आसान शब्दों में समझने के लिए आप यह विडिओ देख सकते हैं  👇  

👉 राजनीतिक सांस्कृतिक उपागम  

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