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लोकतंत्र (Democracy) क्या है?


 लोकतंत्र(Democracy) 

 


 

    "लोकतंत्र जनता का,जनता के लिए, जनता के द्वारा शासन है!"

                                                                          अब्राहम लिंकन

  

अब्राहम लिंकन के द्वारा लोकतंत्र के लिए कहा गया ये वाक्य इसकी परिभाषा स्पष्ट बताता है! लोकतंत्र शब्द बोलने में छोटा लगता है लेकिन इसका असली अर्थ उतना ही बड़ा और मुश्किल है। लोकतंत्र दो शब्दों से मिलकर बना है लोक + तंत्र जिसका अर्थ होता है लोग और शासन, अर्थात जनता का शासन। लोकतंत्र एक ऐसी शासन प्रणाली है, जिसके अंदर जनता अपनी इच्छा से किसी भी दल को अपना वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुन सकती है और उनकी सरकार बना सकती है। आइए इसे और अच्छे से समझते है!


Topic Includes in this blog- 

✅लोकतंत्र (Democracy) अर्थ तथा परिभाषा
लोकतंत्र की विशेषताएं
लोकतंत्र के प्रकार
       ♦ प्रत्यक्ष लोकतंत्र 
       ♦ अप्रत्यक्ष लोकतंत्र 
लोकतांत्रिकरण का अर्थ 
लोकतांत्रिकरण की धारा
        ♦ पहली धारा 
        ♦ दूसरी धारा
        ♦ तीसरी धारा
        ♦ चौथी धारा  

 


लोकतंत्र (Democracy)अर्थ तथा परिभाषा

लोकतंत्र (प्रजातंत्र) मे लोगो के द्वारा चुने गए लोग (प्रतिनिधि) शासन करते है व जनता के हित में काम करते हैं!


लोकतंत्र दो शब्दों से मिलकर बना है  लोक + तंत्र । लोक का मतलब है लोग तथा तंत्र का मतलब होता है शासन अर्थात लोगों का शासन लोकतंत्र कहलाता है।

 

लोकतंत्र को अंग्रेजी में (Democracy) कहते हैं! इस शब्द की उत्पति ग्रीक मूल के शब्द “डेमरोस” से हुई है जिसका अर्थ है जनसाधारण इसमें “क्रेसी”शब्द जोड़ा गया है जिसका अर्थ है शासन या  सरकार! इस तरह लोकतंत्र शब्द का अर्थ हुआ जनता का शासन!



इस टॉपिक को और आसान शब्दों में समझने के लिए आप यह विडिओ देख सकते हैं 👉 लोकतंत्र क्या है?
 

अब्राहम लिंकन के अनुसार- "लोकतंत्र जनता का,जनता के लिए, जनता के द्वारा" शासन है! 



 

लोकतंत्र की विशेषताएं 


  • लोकतंत्र में निश्चित समय पर निश्चित रूप से चुनाव होते हैं!
  • प्रत्येक लोकतांत्रिक देश में एक संविधान(लिखित व मौखिक रूप से दर्ज) की उपस्थिति होती है!
  • लोकतंत्र में कानून का शासन मौजूद होता है!  
  • लोकतंत्र में जनता नए प्रतिनिधियों  चुन सकती है यदि जनता पुराने प्रतिनिधियों के कार्यों से खुश(असंतुष्ट) नहीं है तो उनके स्थान पर नए प्रतिनिधि चुन सकती है।
  • लोकतंत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था होती है जिसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग को दी जाती है।
  • प्रजातंत्र(लोकतंत्र) का मतलब उस राज्य सरकार से हैं जिसमें शासन की सत्ता लोगों के हाथों में होती है जिसमें चुनाव का आधार सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार होता है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को एक निश्चित आयु के बाद मत(वोट) देने का अधिकार होता है! 
  • लोकतंत्र के अंतर्गत जनता को सत्ता का अंतिम स्रोत माना जाता है क्योंकि जनता ही अपने वोटों के द्वारा निर्णय लेती है कि कौन-सा दल सरकार बनाएगा।
  • लोकतंत्र नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है लोकतांत्रिक सरकार के अंदर प्रत्येक नागरिक को अपने विचार प्रकट करने,भाषण देने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है।
  • समाचार पत्रों को सरकार की नीतियों के बारे में अपनी राय देने की छूट होती है इस प्रकार यह जनता तथा सरकार के बीच कड़ी का काम करती है।
  • लोकतंत्र व्यवस्था के अंदर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा होती है तथा राज्य की निरंकुशता को रोकने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका की व्यवस्था होती है।




लोकतंत्र के प्रकार

1 प्रत्यक्ष लोकतंत्र - 

प्रत्यक्ष लोकतंत्र में जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन में भाग लेती है! इसमे जनता और सरकार के बीच में कोई प्रतिनिधि नहीं होता है! इसमे जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि कानून बनाते है और शासन की नीतियाँ निर्धारित करती है!

इस तरह की व्यवस्था उन राज्यों में बेहतर चल सकती है जिनका आकार छोटा होता है और जिनकी जनसंख्या कम होती है! 

उदाहरण - स्विजरलैंड

  

2 अप्रत्यक्ष ( प्रतिनिधि ) लोकतंत्र - 

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को खुद प्रत्यक्ष रूप से चुनती है! इसमे लोगों द्वारा चयनित प्रतिनिधि शासन चलाते हैं! इसमे जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन में भाग नहीं लेती है! इसमे जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि शासन करते है! प्रतिनिधि जनता व सरकार के बीच में एक कड़ी  का काम करते हैं इसलिए इसे अप्रत्यक्ष लोकतंत्र के नाम से भी जाना जाता है!

आज के समय में अप्रत्यक्ष लोकतंत्र लोकप्रिय है! इस तरह की व्यवस्था उन राज्यों में बेहतर चल सकती है जिनका आकार बड़ा होता है और जिनकी जनसंख्या ज्यादा होती है! 

उदाहरण - भारत  

 

 


लोकतांत्रिकरण का अर्थ

परिवर्तन की वह प्रक्रिया जो एक राजनीतिक व्यवस्था (देश) को और अधिक लोकतान्त्रिक व्यवस्था की ओर ले जाती है, वह लोकतांत्रिकरण की प्रक्रिया कहलाती है!

लोकतांत्रिकरण एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक राजनीतिक शासन (देश) गैर-लोकतांत्रिक से लोकतान्त्रिक में बदल जाता है ! लोकतांत्रिकरण वह प्रक्रिया है जो गैर-लोकतांत्रिक समाजों को लोकतंत्र की शुरुआत की ओर ले जाती है!  


विश्व अधिकाधिक लोकतांत्रिक बनता जा रहा है! 1975 से 2000 के बीच लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की संख्या दुगुने से भी अधिक हो गई है! विश्व की अधिकांश जनता लोकतांत्रिक शासन के अधीन है!

अपने मौजूदा चरण में लोकतंत्र ने अपना विस्तार पश्चिमी यूरोप, उतरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक कर लिया है! इसके साथ ही लोकतंत्र अब दक्षिण यूरोप, पूर्वी यूरोप, लैटिन अमेरिका, एशिया और अफ्रीका के भागों में भी फैल चुका है! 

मानव इतिहास में पहली बार विश्व आबादी का एक बड़ा भाग स्वतंत्र रूप से चुनी गई सरकारों के  अंतर्गत शासित है! सैमुअल हंटींग्टन ने इसे "लोकतांत्रिकरण की तीसरी लहर" की संज्ञा दी है और वे इसे मानवजाति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि में से एक मानते है!  

इस टॉपिक को और आसान शब्दों में समझने के लिए आप यह विडिओ देख सकते हैं  👉 लोकतंत्रिकरण क्या है ?

इस शब्द की व्युत्पत्ति यूनानी भाषा के डेमोक्रेटीया शब्द से हुई है जिसका अर्थ है  “जनता द्वारा शासन”! 

लोकतंत्र का मॉडल एक प्रत्यक्ष मॉडल है! लोकतंत्र का जन्म प्राचीन एथेंस में 461 और 322 ईसा पूर्व के बीच हुआ! एथेंस यूनान का एक प्रमुख नगर राज्य था! एथेंस राज्य अरस्तू के द्वारा वर्णित लोकतांत्रिक सिद्धांत के आधार पर संचालित होता था!

 

 

सैमुअल हंटिंगटन ने लोकतांत्रिकरण की प्रक्रिया को विभिन्न धाराओं या चरणों में बांटा है! 

 

प्रथम धारा


  • हंटिंगटन प्रथम धारा को 1828 से मानते हैं!  
  • इस पहले चरण में लगभग 30 देशों ने लोकतांत्रिक राष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना की!
  • अमेरिकियों को मतदान करने का अधिकार प्राप्त हुआ! 
  • 19वीं सदी के प्रारंभ में अमेरिका व ग्रेट ब्रिटेन कई देशों में लोकतंत्र को मजबूती मिली! 
  • यह धारा पूंजीवाद व लोकतंत्र के फैलाव के साथ जुड़ा था! 
  • पहली धारा 1920 में इटली में फासीवाद की पुर्नस्थापना के साथ ही खत्म हो जाती है!

 

दूसरी धारा


  • दूसरी धारा की शुरुआत द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुई और यह 1960 के दशक तक जारी रही! 
  • इसके बाद कई नए राज्यों का उदय हुआ! 
  • इस दौरान अधिकांश राज्यों को औपनिवेशिक शासन से मुक्ति मिली!
  • नए देशों ने लोकतांत्रिक शासन की स्थापना का प्रयास किया लेकिन सभी लंबे समय  तक लोकतांत्रिक नहीं बने रह सके!
  • इस धारा में फासीवाद का अंत हुआ और विउपनिवेशिकरण से उदारवाद को मजबूती मिली
  • दूसरी धारा का अंत कुछ देशों के सत्तावादी शासन को अपना देने के साथ ही हो जाता है! 

 

तीसरी धारा


  • तीसरी धारा 1970 के दशक के मध्य से शुरू हुई व 20वी सदी के अंत तक मानी जाती है! 
  • इस धारा में लैटिन अमेरिका और एशिया के कुछ गैर लोकतांत्रिक देशों ने लोकतांत्रिकरण को अपनाया! 
  • दक्षिण यूरोप में अधिनायक तंत्र का अंत वसोवियत संघ और पूर्वी यूरोप में    साम्यवाद का विघटन हो गया! 
  • बीसवीं शताब्दी के अंत तक लोकतंत्र देश के प्रत्येक भाग तक पहुंच चुका था!
  • इस धारा में गैर लोकतांत्रिक शासन आर्थिक सुधार लाने में असक्षम रहे! 

 

 

चौथा चरण


कुछ विचारको के अनुसार लोकतांत्रिकरण की चौथी धारा जारी है परंतु कुछ प्रश्नों व चुनौतियों के साथ! 

  • 1990 के दशक में 9/11 की घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे बड़े महत्वपूर्ण हो गए हैं! 
  • 1970 के दशक से लोकतांत्रिकरण प्रक्रिया में वृद्धि देखी जा सकती है!
  • 20वी शताब्दी की शुरुआत के साथ ही विउपनिवेशीकरण प्रक्रिया आरंभ हो गई थी!
  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद टर्की ओटोमन साम्राज्य के पतन से कई देश उभरे और तृतीय विश्व में नए देशों के उभरने का महत्वपूर्ण कारण द्वितीय विश्व युद्ध रहा! 
  • 1945 के बाद के 20वर्षों में ही ब्रिटेन,जापान व फ़्रांस जैसी औपनिवेशिक शक्तियों का नियंत्रण उनके अधीन उपनिवेशों पर कमजोर हो गया! जिसके परिणामस्वरूप एशिया,अफ्रीका में नए राज्यों का निर्माण हुआ ! 
  • शीतयुद्ध के बाद नए देशों का उदय हुआ 1945-50 के दौरान अधिकतर देशों ने स्वतंत्रता प्राप्त की!



हम उम्मीद करते हैं इस ब्लॉग से आपको इस टॉपिक को समझने में मदद मिली होगी

धन्यवाद 




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